Tuesday, April 30, 2013

विज्ञान चालीसा

 जय न्यूटन विज्ञान के आगर, गति खोजत ते भरि गये सागर ।... 

ग्राहम् बेल फोन के दाता, जनसंचार के भाग्य विधाता । 

बल्ब प्रकाश खोज करि लीन्हा, मित्र एडीशन परम प्रवीना । 

बायल और चाल्स ने जाना, ताप दाब सम्बन्ध पुराना । 

नाभिक खोजि परम गतिशीला, रदरफोर्ड हैं अतिगुणशीला । 

खोज करत जब थके टामसन, तबहिं भये इलेक्ट्रान के दर्शन । 

जबहिं देखि न्यट्रोन को पाए, जेम्स चैडविक अति हरषाये । 

भेद रेडियम करत बखाना, मैडम क्यूरी परम सुजाना । 

बने कार्बनिक दैव शक्ति से, बर्जीलियस के शुद्ध कथन से । 

बनी यूरिया जब वोहलर से, सभी कार्बनिक जन्म यहीं से । 

जान डाल्टन के गूँजे स्वर, आशिंक दाब के योग बराबर । 

जय जय जय द्विचक्रवाहिनी, मैकमिलन की भुजा दाहिनी । 

सिलने हेतु शक्ति के दाता, एलियास हैं भाग्यविधाता । 

सत्य कहूँ यह सुन्दर वचना, ल्यूवेन हुक की है यह रचना । 

कोटि सहस्र गुना सब दीखे, सूक्ष्म बाल भी दण्ड सरीखे । 

देखहिं देखि कार्क के अन्दर, खोज कोशिका है अति सुन्दर । 

काया की जिससे भयी रचना, राबर्ट हुक का था यह सपना । 

टेलिस्कोप का नाम है प्यारा, मुट्ठी में ब्रम्हाण्ड है सारा । 

गैलिलियो ने ऐसा जाना, अविष्कार परम पुराना । 

विद्युत है चुम्बक की दाता, सुंदर कथन मनहिं हर्षाता । 

पर चुम्बक से विद्युत आई, ओर्स्टेड की कठिन कमाई । 

ओम नियम की कथा सुहाती, धारा विभव है समानुपाती । 

एहि सन् उद्गगम करै विरोधा, लेन्ज नियम अति परम प्रबोधा । 

चुम्बक विद्युत देखि प्रसंगा, फैराडे मन उदित तरंगा । 

धारा उद्गगम फिरि मन मोहे, मान निगेटिव फ्लक्स के होवे । 

जय जगदीश सबहिं को साजे, वायरलेस अब हस्त बिराजै । 

अलेक्जेंडर फ्लेमिंग आए, पैसिंलिन से घाव भराये । 

आनुवांशिकी का यह दान, कर लो मेण्डल का सम्मान । 

डा रागंजन सुनहु प्रसंगा, एक्स किरण की उज्ज्वल गंगा । 

मैक्स प्लांक के सुन्दर वचना, क्वाण्टम अंक उन्हीं की रचना । 

फ्रैंकलिन की अजब कहानी, देखि पतंग प्रकृति हरषानी । 

डार्विन ने यह रीति बनाई, सरल जीव से सॄष्टि रचाई । 

परि प्रकाश फोटान जो धाये, आइंस्टीन देखि हरषाए । 

षष्ठ भुजा में बेंजीन आई, लगी केकुले को सुखदाई । 

देखि रेडियो मारकोनी का, मन उमंग से भरा सभी का । 

कृत्रिम जीन का तोहफा लैके, हरगोविंद खुराना आए । 

ऊर्जा की परमाणु इकाई, डॉ भाषा के मन भाई । 

थामस ग्राहम अति विख्याता, गैसों के विसरण के ज्ञाता । 

जो यह पढ़े विज्ञान चालीसा, देइ उसे विज्ञान आशीषा । 

मनु प्रकाश अब इसके चेरा, मन मस्तिष्क में इसका डेरा ।



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